हिमयुग के दौरान पृथ्वी का तापमान सदैव एक समान नहीं रहता। इसमें दो चरण होते हैं:
यद्यपि मुख्य बर्फ की परतें उत्तरी यूरोप और अमेरिका तक सीमित थीं, लेकिन हिमयुग का प्रभाव भारत पर भी पड़ा. शोध बताते हैं कि हिमयुग के दौरान भारतीय मानसून की शक्ति 20% से 40% तक कम हो सकती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा होती है. ice age in hindi
औद्योगिकीकरण के बाद से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर इतना बढ़ गया है कि ग्रह तेजी से गर्म हो रहा है (ग्लोबल वार्मिंग)। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले हजारों वर्षों तक हिमयुग आने की संभावना नहीं है, क्योंकि हमने वायुमंडल में इतनी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसें भर दी हैं कि पृथ्वी का प्राकृतिक ठंडा होना रुक गया है। दरअसल, हम 'ग्लोबल वार्मिंग' के युग में जी रहे हैं, न कि हिमयुग के। वैज्ञानिकों के अनुसार
हिमयुग पृथ्वी के इतिहास की वह लंबी समयावधि है जब धरती का तापमान बहुत कम हो गया था और उत्तरी व दक्षिणी ध्रुवों की बर्फ फैलकर महाद्वीपों के बड़े हिस्से को ढँक लेती थी. वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी ने अब तक कम से कम पाँच बड़े हिमयुगों का अनुभव किया है. तो हमें हरे-भरे जंगल
आज भी जब हम ठंड से काँपते हैं, या अकेलेपन में जम जाते हैं— समझ लेना, हम उसी हिम युग के बचे-खुचे किरदार हैं। बस फ़र्क इतना है— अब बर्फ़ बाहर नहीं, भीतर है।
जब हम आज पृथ्वी पर नज़र दौड़ाते हैं, तो हमें हरे-भरे जंगल, विशाल महासागर और जीवन की विविधता दिखाई देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही पृथ्वी अतीत में कई बार एक विशाल "बर्फ के गोले" में तब्दील हो चुकी है? पृथ्वी के इतिहास में ऐसे लंबे कालखंड रहे हैं जब ध्रुवीय बर्फ की चादरें (Ice Sheets) न केवल ध्रुवों (North and South Poles) तक सीमित थीं, बल्कि वे महाद्वीपों के विशाल हिस्सों को ढके हुए थीं। इस भयावह और रोमांचक काल को ही कहा जाता है।